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25 मई 2026
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भजनलाल सरकार के ‘खर्च कटौती’ पर बड़े फैसले: सीएम के काफिले में कटौती, विदेशी यात्राओं पर रोक

भजनलाल सरकार के ‘खर्च कटौती’ पर बड़े फैसले: सीएम के काफिले में कटौती, विदेशी यात्राओं पर रोक
भजनलाल सरकार के ‘खर्च कटौती’ पर बड़े फैसले: सीएम के काफिले में कटौती, विदेशी यात्राओं पर रोक

 

अफसर यात्राओं में निजी वाहन का करेंगे उपयोग, शहरी अफसरों के लिए ईवी अनिवार्य
दैनिक सम्राट संवाददाता
जयपुर। राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदलने वाली एक बेहद बड़ी खबर जयपुर सचिवालय से आई है। दरअसल, राजस्थान वित्त विभाग ने प्रदेश में वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक व्यय पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक विस्तृत और सख्त गाइडलाइन वाला परिपत्र जारी कर दिया है। इस नए आदेश का सीधा असर राजस्थान के मंत्रियों के रसूख, बड़े आईएएस-आईपीएस अफसरों की सुख-सुविधाओं और सरकारी दफ्तरों के रोजमर्रा के खर्चों पर पडऩे वाला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद अपने काफिले (कारकेड) की गाडिय़ों को कम करके जिस सादगी की मिसाल पेश की थी, अब उसे पूरे सिस्टम के लिए कानून बना दिया गया है।
  भारी-भरकम काफिलों व बेतहाशा खर्चों पर ब्रेक

भजनलाल सरकार ने मंत्रियों और आयोगों के अध्यक्षों के भारी-भरकम काफिले और सरकारी तेल के भी बेतहाशा खर्च सहित अन्य वीआईपी कल्चर पर वित्त विभाग ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। अत्यावश्यक न्यूनतम वाहन ही होंगे। अनुमत: मुख्यमंत्री के फैसले की तर्ज पर अब राजस्थान के मंत्रियों, विभिन्न बोर्डों, निगमों, अकादमियों और आयोगों के पदाधिकारियों को जिन्हें आधिकारिक तौर पर कारकेड अनुमत है, उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने काफिले में केवल और केवल अत्यावश्यक न्यूनतम वाहनों का ही उपयोग करेंगे। फिजूल की गाडिय़ों को तुरंत काफिले से हटाया जाएगा।

अफसरों के लिए कार पुलिंग का नियम
वीआईपी कल्चर खत्म करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए आदेश दिया गया है कि अगर एक ही गंतव्य या एक ही बैठक की तरफ कई अधिकारी और कर्मचारी जा रहे हैं, तो वे अलग-अलग गाडिय़ों में जाने के बजाय अपने शासकीय, संविदा या निजी वाहनों में कार पुलिंग को प्राथमिकता देंगे। सचिवालय में अब यह नियम कड़ाई से लागू किया जा रहा है। वित्त विभाग का यह नया आदेश राजस्थान को पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी की तरफ ले जाने वाला एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। सरकार अब अपने पूरे ट्रांसपोर्ट बेड़े का कायाकल्प करने जा रही है।
बदले जाएंगे वाहन
राज्य सरकार के सभी पेट्रोल और डीजल से चलने वाले राजकीय वाहनों को अब चरणबद्ध रीके से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में बदलने की जरूरी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
शहरी अफसरों के लिए ईवी अनिवार्य: प्रथम चरण में उन तमाम आला अधिकारियों को टारगेट किया गया है जिनका सामान्य कामकाज या रूटीन ड्यूटी शहर के भीतर (इंट्रा-सिटी) ही रहती है। अब इन अफसरों के लिए भविष्य में क्रय किए जाने वाले सभी नए वाहन केवल और केवल ई-व्हीकल ही होंगे।
संविदा वाहनों में प्राथमिकता: दफ्तरों में जो गाडिय़ां संविदा या किराए पर ली जाती हैं, उनमें भी अब ई-व्हीकल के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का समयबद्ध प्लान: प्रदेश में सरकारी भवनों और प्रमुख जगहों पर ई-व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए संबंधित विभागों को एक निश्चित और समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
फाइव स्टार आयोजनों  और विदेश यात्राओं पर लगाई रोक
ठ्ठ    सरकारी पैसों और जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई से होने वाले फिजूलखर्चों को रोकने के लिए वित्त विभाग ने इस बार सबसे सख्त रुख अपनाया है।
ठ्ठ    राज-काज पोर्टल और आईजीओटी कर्मयोगी पर फोकस
ठ्ठ    सरकारी दफ्तरों में फाइलों के अंबार और कागजों की बर्बादी को रोकने के लिए डिजिटल टूल्स को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
ठ्ठ    विभिन्न सरकारी कार्यालयों के मध्य अब ई-ऑफिस और ई-फाइल का उपयोग शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाएगा। भौतिक पत्राचार (कागजी चि_ियों) के स्थान पर अब राज-काज पोर्टल के उपयोग को अनिवार्य प्राथमिकता दी जाएगी।