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16 मई 2026
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‘अगर कांग्रेस ने साथ दिया होता तो नक्सलवाद साफ हो गया होता’

‘अगर कांग्रेस ने साथ दिया होता तो नक्सलवाद साफ हो गया होता’
‘अगर कांग्रेस ने साथ दिया होता तो नक्सलवाद साफ हो गया होता’

नक्सलवाद पर बोले अमित शाह- जो हथियार उठाएगा, उसे कीमत चुकानी होगी
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि भारत नक्सल-मुक्त हो गया है, ऐसा हम कह सकते हैं। अपनी डेढ़ घंटे स्पीच के दौरान शाह ने कहा- हमने 31 मार्च तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। मैं पूरी व्यवस्था होने के बाद देश को भी सूचित करूंगा।
शाह ने कहा- जो लोग पूरी व्यवस्था को नकार कर हथियार उठा लेते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। सालों से भोले-भाले आदिवासियों को अंधेरे में रखा गया। वामपंथियों ने अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए आदिवासियों को बहकाया। शाह ने कहा- कांग्रेस ने 60 साल के दौरान आदिवासियों तक घर, स्कूल, मोबाइल टॉवर नहीं पहुंचने दिया और अब हिसाब मांग रहे हैं। अपने गिरेबान में झांककर देखिए। आदिवासी इलाकों में गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला बल्कि नक्सलवाद के कारण सालों तक गरीबी रही। नक्सलवाद की जड़ें वैचारिक हैं। यह गरीबी और विकास से जुड़ी नहीं हैं।
संसद में आज नक्सलवाद पर चर्चा सरकार की तरफ से दी गई डेडलाइन खत्म होने से एक दिन पहले हुई। शाह कई बार 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा कर चुके हैं।
बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म: बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है।
नक्सलवाद की वकालत करने वालों से सवाल: जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूं कि आदिवासियों के पास अब तक विकास क्यों नहीं पहुंचा। बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए, क्योंकि इस क्षेत्र पर लाल आतंक का साया मंडरा रहा था। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है।
मनमोहन ने कहा था- माओवादी देश की सबसे बड़ी समस्या: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है। 2014 में बदलाव हुआ। धारा 370 हटी, 35-ए हटा, राम मंदिर बना, सीएए कानून आ गया है, विधायी मंडलों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल गया है।
तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए: जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली। 24 अगस्त 2024 को मैंने कहा था कि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद देश से समाप्त हो जाएगा। 11 साल में 596 पुलिस स्टेशन बने, नक्सल प्रभावित जिले 2014 में 126 थे आज सिर्फ 2 है। ज्यादा प्रभावित जिले 35 थे आज शून्य हैं। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन 350 से 7 हो गए। पिछले तीन साल 2024-25 और 2026 में देश में 706 नक्सली मारे गए, 2218 गिरफ्तार और 4839 ने सरेंडर किया।
कांग्रेस ने नक्सलियों का समर्थन किया
70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही। आपने क्यों नहीं किया विकास। आज आप हिसाब मांग रहे हो। इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में थीं। उनके कार्यकाल में नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन 12 राज्यों, 17 प्रतिशत भू-भाग 10 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में फैल गया। राहुल गांधी ने नक्सल समर्थकों के साथ मंच साझा किया था और ‘प्रो-हिडमा’ नारे का समर्थन किया था। ‘अगर कांग्रेस ने साथ दिया होता तो आज नक्सलवाद साफ हो गया होता’।