नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम में जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति का सख्त रुख दिखा, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे कूटनीति भी चलती रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अहम भूमिका निभाई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कड़े बयानों और धमकियों के बीच, उनके सहयोगी जेडी वेंस ने पर्दे के पीछे बातचीत का जिम्मा संभाला। माना जा रहा है कि दोनों ने मिलकर 'गुड कॉप-बैड कॉप' रणनीति अपनाई, जिससे ईरान पर दबाव भी बना और बातचीत का रास्ता भी खुला।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जेडी वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ मिलकर ईरान के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की और उन्हें युद्धविराम के लिए राजी किया। इससे पहले भी यह सामने आ चुका था कि वेंस इस पूरे बातचीत प्रक्रिया का हिस्सा थे, लेकिन अब माना जा रहा है कि उनकी भूमिका और भी ज्यादा अहम थी।
'शांति दूत' की भूमिका में वेंस
मार्च के मध्य में जब युद्धविराम की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी, तब जेडी वेंस ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत शुरू कर दी थी। वेंस, जो पहले इराक युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं, इस युद्ध को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इसे अमेरिका के लिए महंगा और संसाधनों की बर्बादी बताया था। हालांकि, उनकी इस राय के बावजूद उन्हें बातचीत से बाहर नहीं किया गया और वे लगातार ट्रंप के करीबी सलाहकार बने रहे।
ईरान ने क्यों किया भरोसा?
ईरान पहले अमेरिका के कुछ प्रतिनिधियों से निराश हो चुका था, खासकर स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ हुई बातचीत के बाद। इसलिए उसने इनसे सीधे बातचीत करने से इनकार कर दिया था।
ऐसे में जेडी वेंस एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आए, क्योंकि वे युद्ध के प्रति सख्त रुख के बजाय संतुलित नजरिया रखते थे और उनका सीधा संपर्क ट्रंप से था। अमेरिकी अधिकारियों का भी मानना था कि अगर ईरान वेंस के साथ समझौता नहीं करता, तो फिर कोई डील संभव नहीं होगी।
पर्दे के पीछे चली बातचीत
जब ट्रंप सार्वजनिक तौर पर कड़े बयान दे रहे थे और हमले की चेतावनी दे रहे थे, उसी समय वेंस पर्दे के पीछे बातचीत में लगे थे। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और ईरान के अधिकारियों के साथ मिलकर सीजफायर की शर्तों को तैयार करने में भूमिका निभाई। ट्रंप ने भी सार्वजनिक तौर पर वेंस के इस काम का समर्थन किया, जिससे उनकी भूमिका और मजबूत हुई।
इस सफल पहल के बाद जेडी वेंस की स्थिति अमेरिकी प्रशासन में और मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि आगे होने वाली बातचीत में भी वे अहम भूमिका निभाएंगे। खासकर इस्लामाबाद में होने वाली अगली वार्ता में उनकी मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते पर चर्चा होगी।