डॉ.भीमराव अम्बेडकर पीठ दुर्दशा का शिकार
दैनिक सम्राट संवाददाता
जमवारामगढ़ (अंकिता शर्मा)। डॉ.भीमराव अम्बेडकर के नाम पर मूंडला में स्थापित डॉ. भीमराव अम्बेडकर पीठ अपनी स्थापना के 19 वर्ष पूरे करने जा रही है, लेकिन अपने मूल उद्देश्य से अब भी काफी दूर नजर आ रही है। वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा अम्बेडकर जयंती के अवसर पर स्थापित इस पीठ का उद्देश्य विधि, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र और लोक प्रशासन सहित छह विषयों में शोध को बढ़ावा देना था।
करीब 75 बीघा क्षेत्र में फैले इस विशाल परिसर पर लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसमें प्रशासनिक भवन, छात्र-छात्रा छात्रावास, ई-लाइब्रेरी, कॉन्फ्रेंस हॉल, पार्क और बाबा साहब की प्रतिमा जैसे निर्माण शामिल हैं। इसके बावजूद संस्थान में शोध गतिविधियां नगण्य हैं और यह केवल वेतन वितरण तक सीमित होकर रह गया है। शोध के बजाय औपचारिकताएं
संस्थान द्वारा पांच दलित विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय और छह विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है, लेकिन पिछले नौ वर्षों में एक भी छात्र ने अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति का लाभ नहीं लिया। इसके अलावा केवल एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिससे संस्थान की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अम्बेडकर पीठ अपने उद्देश्य से भटक चुकी है। यदि समय रहते शोध गतिविधियों को सक्रिय नहीं किया गया तो यह संस्थान केवल सरकारी खर्च का बोझ बनकर रह जाएगा। भाजपा सरकार यह ड्रीम प्रोजेक्ट सिर्फ कागजी साबित हो रहा है।
कॉन्फ्रेंस हॉल का फर्नीचर हो रहा खराब: पीठ में स्थित शारदार कॉन्फ्रेंस हॉल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जहां प्रत्येक कुर्सी पर माइक की व्यवस्था है। लेकिन उपयोग नहीं होने के कारण महंगा फर्नीचर खराब होता जा रहा है।
प्रशासनिक भवन हो रहा जर्जर: लंबे समय तक बंद रहने के कारण प्रशासनिक भवन की हालत बिगडऩे लगी है। दीवारों में सीलन, जगह-जगह उखड़ा पलस्तर और रंगरोगन का अभाव साफ नजर आता है।
70 लाख से होगी मरम्मत: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने भवन की मरम्मत और रंगरोगन के लिए 70 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। इस संबंध में पीठ की सचिव सुमन मीना ने भी इसकी पुष्टि की है।
समतलीकरण की जरूरत: पीठ परिसर का अधिकांश हिस्सा उबड़-खाबड़ है, जिससे इसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा। यदि भूमि का समतलीकरण किया जाए तो यहां एक बड़ा मैदान विकसित किया जा सकता है।
इनका कहना है
अम्बेडकर पीठ के भवन की मरम्मत के लिए 70 लाख की स्वीकृति जारी की गयी है।शोध के लिए अभी मंजूरी नही मिली है।
सुमन मीना सचिव डॉ.बीआर अम्बेडकर फांउडेशन, मूंडला जमवारामगढ (जयपुर)
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