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15 अप्रैल 2026
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2029 से लागू होगा महिला आरक्षण, 543 से बढ़ाकर 850 होगी लोकसभा की सीटें

2029 से लागू होगा महिला आरक्षण, 543 से बढ़ाकर 850 होगी लोकसभा की सीटें
2029 से लागू होगा महिला आरक्षण, 543 से बढ़ाकर 850 होगी लोकसभा की सीटें

सरकार ने संसद को भेजा प्रस्ताव, प्रस्तावित विधेयक से पर्दा हटा 

नई दिल्ली। सरकार ने संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा में सीटों की वर्तमान 543 की संख्या को बढ़ाकर 850 करने संबंधी 131वें संविधान संशोधन विधेयक के साथ ही 2011 की जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के परिसीमन संबंधी प्रस्तावित विधेयक से पर्दा हटा दिया है।
इसके अनुसार लोकसभा की प्रस्तावित 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों से होंगी जिनका सीधे चुनाव होगा। केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लोकसभा में 35 सीटें होंगी मगर विधेयक में इनके सीधे निर्वाचन का जिक्र नहीं करते हुए इस बारे में निर्णय संसद पर छोड़ा गया है।
131वें संविधान संशोधन में क्या है?
विधेयक में साफ कहा गया है कि संसद जो भी नियम बनाएगी केंद्र शासित प्रदेशों की लोकसभा सीटों के सदस्यों का चयन उसी आधार पर होगा। 16-18 अप्रैल तक बुलाए गए संसद के तीन दिन के विशेष सत्र से पूर्व इन दोनों विधेयकों की प्रतियां सांसदों को भेज दी गई हैं।
हालांकि पांच राज्यों के चुनाव के बीच महिला आरक्षण के सरकार के दांव पर पहले ही सवाल उठा चुके विपक्ष के विधेयक पर प्रारंभिक प्रतिक्रियाओं से साफ है कि 2011 की जनसंख्या को परिसीमन का आधार बनाने के मुद्दे पर पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव तय है।
2029 से लागू होगा महिला आरक्षण
संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 2029 के चुनाव से लागू करने के लिए सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 तथा परिसीमन कानून में संशोधन का यह प्रस्ताव किया है। सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिला आरक्षण की व्यवस्था 2034 से लागू करने का प्रविधान है, लेकिन सरकार अब इसे लोकसभा के अगले आम चुनाव से लागू करना चाहती है।
लोकसभा के सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करते हुए महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 81 तथा परिसीमन 2011 की जनसंख्या के आधार पर कराने के लिए अनुच्छे 82 में संशोधन का प्रस्ताव किया है। वर्तमान कानून के अनुसार 2021 की जनगणना के बाद लोकसभा की सीटों के परिसीमन का प्रविधान है।चूंकि 2021 की जनगणना में विलंब हुआ है और यह 2027 में होगी। इसीलिए सरकार ने पिछली जनगणना के आंकड़े को आधार बनाने का निर्णय लिया है।
विपक्ष का समर्थन 
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल महिला आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं मगर 2011 की जनसंख्या को परिसीमन का आधार बनाने के प्रस्ताव से सहमत नहीं है।विपक्षी दलों का साफ कहना है कि विधेयक के प्रस्तावों से साफ है कि केवल जनसंख्या को आधार बनाने से उन राज्यों को भारी राजनीतिक नुकसन होगा जिन्होंने शैक्षणिक तथा विकास मानकों पर अच्छे प्रदर्शन के साथ जनसंख्या नियंत्रण के लिए बेहतर कदम उठाए हैं।
इसमें विशेषकर दक्षिण के राज्यों की राजनीतिक ताकत उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों की तुलना में घटेगी। द्रमुक नेता तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधेयक का पारूप सामने आने के दिन ही दो टूक विरोध का एलान करते हुए कहा कि केवल जनसंख्या को लोकसभा सीटें तय करने को प्रस्ताव को वे कतई स्वीकार नहीं करेंगे और राज्य के लोग इसके खिलाफ सडक़ों पर उतरेंगे। वहीं सरकार ने तर्क दिया है कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के काम में काफी समय लगेगा।
ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की प्रभावी और समर्पित भागीदारी में देरी होगी। इसलिए, प्रस्तावित बिल का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं के लिए एक तिहाई यानि 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण भी शामिल है।
ओबीसी वर्ग के लिए क्या है खास?
ओबीसी वर्ग की महिलाओं का प्रस्तावित विधेयक में कोई अलग से कोटे का उल्लेख नहीं है। प्रस्तावित विधेयक में महिलाओं के लिए आरक्षण की इस व्यवस्था को 15 साल तक लागू करने की बात कही गई है यानि 2029 से 2039 के तीन आम चुनाव तक संसद तथा विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू रहेगा और आगे आरक्षण बढ़ाने के बारे में फैसला संसद लेगी।
महिलाओं के लिए लोकसभा सीटों का आरक्षण रोटेशन के आधार पर किया जाएगा। परिसीमन के साथ 850 लोकसभा सीटों का निर्धारण करने के लिए विधेयक में एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रविधान भी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड या मौजूदा जज परिसीमन आयोग के अध्यक्ष होंगे। हालांकि परिसीमन पर होने वाले खर्च भारत की समेकित निधि से होंगे हालांकि इन पर होने वाले खर्चे का अभी अनुमान नहीं लगाया गया है।