नई दिल्ली। तकनीक और विकास के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने वाला जापान, कुदरत के एक ऐसे चक्र में फंसा है जिससे निकलना नामुमकिन है। जापान में हर साल औसतन 1,500 से अधिक भूकंप दर्ज किए जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जापान में ही इतने भूकंप क्यों आते हैं?
चार प्लेटों का खतरनाक मिलन
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, जापान की भौगोलिक स्थिति ही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। यह देश दुनिया की चार सबसे प्रमुख विवर्तनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है: प्रशांत प्लेट, फिलिपींस सागर प्लेट, यूरेशियन प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट। ये विशाल प्लेटें जमीन के नीचे लगातार गतिमान रहती हैं।
सबडक्शन: तबाही की जड़
भूकंप का मुख्य कारण 'सबडक्शन' नामक प्रक्रिया है। जापान के पास, प्रशांत और फिलिपींस सागर प्लेटें लगातार यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही हैं। इस घर्षण और टकराव से जमीन के नीचे भारी तनाव पैदा होता है। जब यह दबाव अपनी सहनशक्ति की सीमा पार कर जाता है, तो ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, जिससे धरती कांप उठती है।
हमेशा तैयार रहता है जापान
इतने अधिक भूकंपों के बावजूद जापान ने खुद को इस तरह ढाला है कि वहां जान-माल का नुकसान न्यूनतम होता है। दुनिया के सबसे उन्नत 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' और भूकंप-रोधी इमारतों की तकनीक ने जापान को इस प्राकृतिक आपदा से लड़ने की ताकत दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह "सबडक्शन जोन" जितना गहरा और बड़ा होगा, भविष्य में उतने ही शक्तिशाली भूकंप की संभावना बनी रहेगी।