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24 मई 2026
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सबसे ताकतवर रॉकेट 'स्टारशिप' के नए और बड़े वर्जन (V3) का 12वां टेस्ट, इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया

सबसे ताकतवर रॉकेट 'स्टारशिप' के नए और बड़े वर्जन (V3) का 12वां टेस्ट,  इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया
सबसे ताकतवर रॉकेट 'स्टारशिप' के नए और बड़े वर्जन (V3) का 12वां टेस्ट, इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट 'स्टारशिप' के नए और बड़े वर्जन (V3) का पहला लॉन्च सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा।

टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित 'स्टारबेस' लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा।

स्टारशिप सीरीज के पहले भी कई लॉन्च हो चुके हैं, लेकिन इस तीसरी पीढ़ी (V3) के अपग्रेड रॉकेट का पहला ही टेस्ट था और स्टारशिप का 12वां टेस्ट था। इसे भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया।

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली 'स्टारशिप' कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है।

बूस्टर नहीं कर पाया कंट्रोल्ड लैंडिंग, फेल हुआ बर्न टेस्ट

रॉकेट का पहला हिस्सा यानी 'सुपर हैवी बूस्टर' अपना 'बूस्ट बैक' बर्न पूरा नहीं कर सका। यह वह प्रक्रिया होती है जिसकी मदद से बूस्टर वापस आकर जमीन पर या समुद्र में एक नियंत्रित लैंडिंग करता है। बर्न पूरा न होने की वजह से यह बूस्टर पूरी तरह नियंत्रित तरीके से पानी में नहीं गिर सका।

स्टारशिप का छठा इंजन स्टार्ट नहीं हुआ

बूस्टर से अलग होने के बाद जब मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को आगे बढ़ना था, तब उसके छह में से केवल पांच इंजन ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट न होने के कारण यह पूरी तरह से सटीक ऑर्बिटल पाथ पर नहीं पहुंच पाया।

इसके बावजूद इसकी ट्रेजेक्टरी इतनी सुरक्षित सीमा के भीतर थी कि यह एक 'सबऑर्बिटल' फ्लाइट को पूरा कर सका। इस तकनीकी खराबी के चलते टीम अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का टेस्ट नहीं कर पाई।

इस टेस्ट का मुख्य मकसद रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च करना, उसे ऊपर ले जाना, ऊपर के हिस्से (स्टारशिप) से अलग करना और फिर इंजन को दोबारा चालू करके समुद्र (गल्फ ऑफ अमेरिका) में तय जगह पर सुरक्षित लैंड कराना था।

बूस्टर से अलग होने के बाद जब मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को आगे बढ़ना था, तब उसके छह में से केवल पांच इंजन ही चालू हो पाए।

बूस्टर से अलग होने के बाद जब मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को आगे बढ़ना था, तब उसके छह में से केवल पांच इंजन ही चालू हो पाए।

अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें….

11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े

स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था।

स्टारशिप को 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को भारतीय समय के अनुसार सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था।

स्टारशिप को 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को भारतीय समय के अनुसार सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था।

10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े

स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया।

ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए।

स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है।

मिशन में पहली बार आठ स्टारलिंक सिम्युलेटर डिप्लॉय किए गए।

मिशन में पहली बार आठ स्टारलिंक सिम्युलेटर डिप्लॉय किए गए।

स्टारशिप के ऊपरी हिस्से की इंडियन ओशन में कंट्रोल्ड वॉटर-लैंडिंग कराई गई।

स्टारशिप के ऊपरी हिस्से की इंडियन ओशन में कंट्रोल्ड वॉटर-लैंडिंग कराई गई।

29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था

इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था।