चेंगड़ाबांधा। भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया है। तीनबीघा कारिडोर से सटे दहग्राम-अंगारपोटा सीमा क्षेत्र में कंटीले तार की बाड़ लगाने को लेकर शुक्रवार को अचानक स्थिति गर्मा गई।
आरोप है कि सीमा पर जमीन मापने का कार्य शुरू होते ही बार्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने आपत्ति जताई, जिसके परिणामस्वरूप पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया। सूत्रों के अनुसार, मेखलीगंज ब्लाक के सीमावर्ती खुले इलाकों में तारबंदी पूरी करने के लिए लगभग 105 एकड़ जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता है।
इनमें से लगभग 80 एकड़ जमीन भारत के भीतर स्थित बांग्लादेशी छिटमहल दहग्राम-अंगारपोटा इलाके में आती है। इसी प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारी जमीन मालिकों की मौजूदगी में जमीन की माप-जोख कर रहे थे। तभी कुछ बांग्लादेशी नागरिकों और बीजीबी जवानों ने इस कार्य पर आपत्ति जताई, जिससे सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।
BSF ने संभाला हालात
हालांकि, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने संयम बरतते हुए हालात को संभाला और किसी बड़े टकराव को टाल दिया। वही घटना के बाद शनिवार को विधायक दधिराम राय खुद सीमा क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने बीएसएफ अधिकारियों के साथ बैठक की।
इस दौरान सीमा पर बीएसएफ और बीजीबी के बीच फ्लैग मीटिंग भी हुई। बैठक में बीएसएफ की 174वीं बटालियन के कमांडिंग आफिसर विनोद सिंह तथा बीजीबी की ओर से नाजियुर रहमान समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

घटना के बाद सीमावर्ती गांवों के लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय निवासी विष्णुपद राय और जयनाथ राय ने कहा कि भारतीय जमीन पर विकास कार्य करने में बार-बार अड़चने पैदा की जा रही है। उनका कहना था कि शुक्रवार को भी भारत की जमीन पर काम रोका गया। लेकिन बीएसएफ ने बेहद धैर्य और समझदारी से हालात संभाले।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए तेजी से तारबंदी का कार्य पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा सकती है।
सीमा पर काम रुकने को लेकर भड़के भाजपा विधायक
बैठक के बाद विधायक दधिराम राय ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार अगले 45 दिनों के भीतर कंटीले तार की बाड़ लगाने का कार्य पूरा करना होगा। देश की सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अगर बांग्लादेश की ओर से किसी तरह की बाधा आती है तो उसका सख्ती से सामना किया जाएगा।