महिला आरक्षण बिल: पास होने के लिए चाहिए थे 352, कुल 528 वोट पड़े, इनमें समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े
दैनिक सम्राट संवाददाता
नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (131वां संविधान संशोधन विधेयक) और परिसीमन विधेयक सहित तीनों विधेयक दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण गिर गए। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जब मत विभाजन कराया तो कुल 528 वोट पड़े। इनमें समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
परिणाम से स्पष्ट है कि महिला आरक्षण से कहीं अधिक परिसीमन को लेकर चिंता जता रहा विपक्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बावजूद अपने विरोध से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका
सरकार की ओर से यह समझाने की कोशिश हुई कि सीटें बढ़ेंगी तभी महिलाओं के लिए आरक्षण सही तरह से लागू हो सकेगा और सभी राज्यों में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें भी बढ़ेंगी।
शाह की ओर से शुक्रवार को यह तक कहा गया कि वह लिखित रूप में संशोधित विधेयक के अंदर भी इसे शामिल करने को तैयार हैं। इस आश्वासन से दक्षिण के नेताओं में यह भरोसा जगता दिखा कि उनके राज्यों में सीटें बढ़ेंगी। लेकिन विपक्ष ने यह कहते हुए परिसीमन का विरोध किया कि इसकी आड़ में सीटों की संरचना में हेरफेर होगा।
विपक्ष की मंशा भांपकर प्रधानमंत्री ने पहले ही इस नैरेटिव की नींव रख दी थी कि विधेयक का विरोध करने वाले महिला विरोधी होंगे और देश की नारी शक्ति उनकी नीयत देखेगी। शुक्रवार को पोस्ट कर उन्होंने सभी सदस्यों से स्वविवेक से वोट करने की अपली भी की थी।
दो दिनों तक चली लंबी चर्चा के बाद मत विभाजन में मोदी सरकार की ओर से प्रस्तुत विधेयक दो तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया। परिणाम घोषित होते ही विपक्षी खेमे ने मेजें थपथपाकर प्रसन्नता व्यक्त की।
इसके साथ ही पूर्व में हुए प्रयासों की तरह महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण की राह में राजनीतिक दलों के स्वार्थ और राजनीति फिर आड़े आ गई। जैसे ही 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिरा, वैसे ही सत्ता पक्ष ने विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश की।
सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला: परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा: केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दोनों बिल पहले से जुड़े हुए हैं, इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है। 12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने लोकसभा में एक घंटे की स्पीच में कहा था कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी।
कांग्रेस के कारण महिलाओं को न्याय मिलने में देर होगी: भाजपा
सदन के बाहर भाजपा नेताओं ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस के कारण महिलाओं को न्याय मिलने में देर होगी। सदन के बाहर राजग की महिला सांसदों ने काली तख्ती लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़़ा किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने सदन में ही कह दिया कि हम सभी के पास महिलाओं को आरक्षण देने के ऐतिहासिक विधेयक को पारित करने का अवसर था, लेकिन विपक्ष ने साथ नहीं दिया। माना जा रहा है कि यह चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा। संभवत: हर राज्य में राजग की ओर से यह बताया जाएगा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिलाओं के जल्द आरक्षण में पेंच फंसाया।
एनडीए के पास केवल 293 सांसद, चाहिए 352 थे
बिल पर 528 सांसदों ने वोट किया। इसका दो तिहाई 352 होता है, लेकिन बिल के समर्थन में 298 वोट ही मिले। एनडीए के पास 293 सांसद हैं। भाजपा सिर्फ 5 अन्य सांसदों को कन्वेंस कर पाई। बाकी विपक्ष को विश्वास में लेने में सफल नहीं हुई, इसलिए बिल पास नहीं करा पाई।
अब सरकार के सामने क्या विकल्प
सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटें बढ़ाने का प्रावधान। यानी 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार बनाएगी। नए सिरे से बिल पेश कर सकती है। विपक्ष के सुझाव लेकर सहमति बना सकती है।
विपक्ष के विरोध की असली वजह क्या है?
विपक्ष ने महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध नहीं किया लेकिन इससे जुड़े दोनों बिल के खिलाफ ही। विपक्ष ने परिसीमन बिल के विरोध के दो कारण बताए। पहला- इससे दक्षिणी राज्यों की संसद में ताकत कम हो जाएगी। दूसरा- यह ओबीसी और एसटी-एससी तबके के खिलाफ है।
अगर बिल पास हो जाता तो क्या होता?
सरकार ने कहा कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटें 50 प्रतिशत बढ़ जातीं। बढ़ी सीटों के हिसाब से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता। जैसे- यूपी में अभी 80 लोकसभा सीटें हैं। बिल पास होने के बाद यह 120 हो जातीं, जिनमें से 40 महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं।