वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के एफ-15ई फाइटर जेट के दोनों पायलट्स को 36 घंटे के भीतर ईरान से रेस्क्यू कर लिया गया। इसके मेन पायलट को शुक्रवार रात को ही बचा लिया था, जबकि एयरमैन यानी वेपन सिस्टम ऑफिसर को शनिवार रात रेस्क्यू किया गया। अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने एयरमैन को बचाने के लिए एक खास ऑपरेशन चलाया था, जिसमें सैकड़ों अमेरिकी कमांडो शामिल थे। इन्होंने ईरान के कॉफी अंदर जाकर रेस्क्यू ऑपरेशन किया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, अफसर को चोटें आई हैं, लेकिन वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, घायल अफसर तक पहुंचने के लिए अमेरिकी और ईरानी फोर्सेस के बीच करीब दो दिन तक ‘जिंदगी और मौत’ की दौड़ चली। हालांकि रेस्क्यू टीम को कोई नुकसान नहीं हुआ।
पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर
अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को एस-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक मेन पायलट और एक एयरमैन यानी वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। मेन पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन एयरमैन पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा।
CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया
अमेरिका और ईरान एयरमैन को ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रेवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी।
एयरमैन को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई।
इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके एयरमैन की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया।
एयरमैन के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी
शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए।
घायल एयरमैन के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए।
अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैक्कार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था।
इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैक्कार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है।
पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट
रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, एयरमैन को अपनी रेस्क्यू टीम तक पहुंचने के लिए बहुत जोखिम भरा कदम उठाना पड़ा। हालांकि, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब यह एयरमैन करीब 36 घंटे तक ईरान के पहाड़ी इलाके में छिपा रहा, तब अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन ने उन ईरानी लोगों पर फायरिंग की, जो उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। यह जानकारी ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों और सूत्रों के हवाले से दी गई है।
जर्नल के अनुसार, इस रेस्क्यू मिशन के दौरान दर्जनों अमेरिकी विमान कमांडो टीम को सुरक्षा दे रहे थे, जो तेजी से अंदर जाकर एयरमैन को निकालकर ले आई। हालांकि, जमीन पर अमेरिकी फोर्स को ज्यादा बड़ा विरोध नहीं झेलना पड़ा।