Dainik Samrat Logo
🔗
💬 WhatsApp 📘 Facebook 🐦 Twitter
17 मई 2026
Epaper

9 साल के मासूम निलय ने छोड़ा सांसारिक जीवन, अध्यात्म की राह पर बढ़ाए कदम

9 साल के मासूम निलय ने छोड़ा सांसारिक जीवन, अध्यात्म की राह पर बढ़ाए कदम
9 साल के मासूम निलय ने छोड़ा सांसारिक जीवन, अध्यात्म की राह पर बढ़ाए कदम

कम उम्र में वह फैसला ले लिया जिसे बड़े-बड़े लोग सोच भी नहीं पाते। वर्धमान और जयवन्त सेठी परिवार में जन्मे 9 वर्षीय निलय सेठी ने भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर वैराग्य का रास्ता अपना लिया है।


मुंबई के स्कूल से अध्यात्म के सफर तक-निलय मुंबई के एक स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ रहे थे। सामान्य बच्चों की तरह खेलने-कूदने की उम्र में उनके भीतर वैराग्य का भाव जागा और उन्होंने सांसारिक जीवन को अलविदा कह दिया। उनकी माता (ब्रह्मचारिणी पायल जी) के अनुसार, जनवरी 2025 में आचार्य सुनील सागर जी ने उन्हें ब्रह्मचारी संस्कार देकर नया नाम 'शुभंकर' दिया। इसके बाद अप्रैल 2026 में आचार्य प्रसन्न सागर जी से दीक्षा लेकर उन्होंने 'दो प्रतिमा' के बेहद कठिन व्रतों की शुरुआत की।
पलकें झपकाते ही याद हो जाते हैं जटिल ग्रंथ-उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन शुभंकर की बुद्धि और याददाश्त हैरान करने वाली है। उन्हें संस्कृत और प्राकृत भाषा के कई कठिन और प्राचीन ग्रंथ पूरी तरह याद हैं। इसके साथ ही वे प्राचीन ब्राह्मी लिपि को पढ़ना और समझना भी सीख रहे हैं।तपस्या जैसी है रोज़ की दिनचर्या-9 साल के शुभंकर का जीवन अब किसी कठोर तपस्वी जैसा है*-
पैदल यात्रा , वे कहीं भी जाने के लिए बिना जूतों के, नंगे पैर पैदल चलते हैं।
सादा बिस्तर: सोने के लिए वे किसी गद्दे का नहीं, बल्कि सिर्फ चटाई या लकड़ी के तख्ते का इस्तेमाल करते हैं।


शुद्ध खान-पान: बाजार की सभी चीजों को उन्होंने हमेशा के लिए छोड़ दिया है। वे सिर्फ कुएं का पानी पीते हैं और घर में पिसे शुद्ध मसालों व आटे से बना सादा भोजन करते हैं।इतनी छोटी उम्र में ऐसा त्याग और समर्पण देखकर हर कोई हैरान है।