दैनिक सम्राट संवाददाता
चाकसू (लोकेश कुमार गुप्ता)। चाकसू में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पालिका द्वारा विकास के नाम पर किए जा रहे निर्माण कार्य अब लोगों के लिए चर्चा ही नहीं बल्कि गुस्से का विषय बनते जा रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीन पर विकास की तस्वीर बेहद बदहाल दिखाई दे रही है। ताजा मामला नगर पालिका के वार्ड नंबर 3 चावण्डिया की ढाणी का है, जहां लाखों रुपए की लागत से बनाई गई सीसी सडक़ महज एक महीने में ही उखड़ गई। सडक़ की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो वर्षों पुरानी सडक़ हो। इस घटना ने नगर पालिका की कार्यशैली, निर्माण गुणवत्ता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सडक़ निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और बिना गुणवत्ता जांच के आनन-फानन में काम पूरा कर दिया गया। सडक़ के कई हिस्सों में सीमेंट की परत उखड़ चुकी है, गिट्टी बाहर निकल आई है और जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। सडक़ से गुजरने वाले वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
लोगों का कहना है कि जब सडक़ एक महीने भी नहीं टिक पाई तो आने वाले समय में विकास कार्यों की स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही नगर पालिका द्वारा जल्दबाजी में सडक़ों का निर्माण कराया जा रहा है ताकि जनता को विकास का दिखावा किया जा सके, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि सडक़ निर्माण के दौरान किसी भी प्रकार की निगरानी नहीं की गई। ना तो तकनीकी अधिकारियों ने मौके पर आकर गुणवत्ता जांच की और ना ही जनप्रतिनिधियों ने जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया। लोगों का कहना है कि सडक़ बनने के समय ही कई बार घटिया निर्माण सामग्री को लेकर आवाज उठाई गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
इस मामले में जब नगर पालिका के ईओ बनवारी लाल मीणा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव करना भी जरूरी नहीं समझा।कॉल करने के बावजूद जवाब नहीं मिला। इससे लोगों में और अधिक नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी जनता के सवालों का जवाब देने को तैयार नहीं हैं तो आमजन अपनी समस्या लेकर आखिर जाएं तो कहां जाएं।
वहीं चाकसू विधायक रामावतार बैरवा से भी इस मामले में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने भी फोन रिसीव नहीं किया। विधायक और अधिकारियों की इस चुप्पी ने जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब जनता समस्याओं से जूझती है तो कोई सुनने वाला नहीं होता।
चाकसू कस्बे में इन दिनों कई वार्डों में सडक़ निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। नगर पालिका चुनावों को देखते हुए विकास कार्यों की बाढ़ सी आ गई है। लेकिन जिस प्रकार एक माह में सडक़ उखडऩे का मामला सामने आया है, उसने बाकी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि विकास कार्यों के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
यदि यही हाल रहा तो जनता का सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों से विश्वास उठ जाएगा। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि पहले कम संसाधनों में भी मजबूत सडक़ें बनती थीं जो वर्षों तक चलती थीं, लेकिन अब करोड़ों खर्च होने के बावजूद सडक़ें कुछ महीनों में टूट रही हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जागरूक नागरिकों ने भी मामले को गंभीर बताया है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगाई गई तो विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सडक़ निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की जांच करवाई जाए, तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। चावण्डिया की ढाणी के लोगों का कहना है कि वे वर्षों से अच्छी सडक़ और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे थे। जब सडक़ बनी तो लोगों को उम्मीद जगी कि अब क्षेत्र का विकास होगा, लेकिन एक महीने में ही सडक़ उखडऩे से उनकी उम्मीदें टूट गईं। लोगों का कहना है कि उन्हें विकास नहीं बल्कि भ्रष्टाचार मिला है। फिलहाल चाकसू की जनता जवाब चाहती है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है।
चाकसू विकास के नाम पर तरसता कस्बा, एक माह में उखड़ी सडक़ ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
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