कस्बे के वार्ड नंबर 13 में मकानों में आई दरारें, लिकेज पाइपलाइन बनी बड़ी वजह — लोगों में दहशत, प्रशासन बेखबर
चाकसू (लोकेश कुमार गुप्ता) कस्बे के वार्ड नंबर 13 स्थित स्टेट बैंक ऑफ बालवाड़ी मोहल्ले में इन दिनों हालात चिंताजनक बने हुए हैं। वार्ड नंबर 13 में कई मकानों में अचानक दरारें आने से लोगों में भय का माहौल व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसों पुरानी पानी की पाइपलाइन में हो रहे लगातार लिकेज के कारण मकानों की नींव में पानी रिस रहा है, जिससे धीरे-धीरे दीवारें कमजोर हो रही हैं और अब उनमें बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं।मोहल्ले के लोगों ने बताया कि यह समस्या पिछले काफी समय से बनी हुई है, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मकानों में रहना भी खतरे से खाली नहीं है। कई घरों की दीवारों और फर्श में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
नालियों के अभाव ने बढ़ाई परेशानी
वार्ड नंबर 13 में नालियों का समुचित निकास नहीं होने से समस्या और अधिक गंभीर हो गई है। बारिश का पानी और पाइपलाइन का रिसाव एक साथ मिलकर सड़कों और मकानों की नींव में लगातार समा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते नालियों की उचित व्यवस्था कर दी जाती, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
मोहल्ले में रहने वाले निवासीयों ने बताया कि “पानी की निकासी सही नहीं होने के कारण हर समय गीलापन बना रहता है। इससे मकानों की नींव कमजोर हो गई है और अब दीवारों में दरारें साफ नजर आ रही हैं।”
पुरानी पाइपलाइन बनी मुसीबत
जानकारी के अनुसार, मोहल्ले में बिछी पानी की पाइपलाइन कई वर्षों पुरानी है और जगह-जगह से जर्जर हो चुकी है। पाइपलाइन में हो रहे लिकेज से लगातार पानी जमीन में रिस रहा है, जिससे आसपास के मकानों की नींव पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार इस समस्या की शिकायत नगरपालिका प्रशासन को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
सड़क पर लगा बिजली का खंभा, मकानों पर मंडरा रहा खतरा
मोहल्ले की एक और बड़ी समस्या सड़क किनारे लगा बिजली का पोल है। यह पोल न केवल यातायात में बाधा बन रहा है, बल्कि आसपास के मकानों के लिए भी खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि किसी कारणवश यह पोल गिरता है, तो आसपास के घरों को भारी नुकसान हो सकता है।
धार्मिक स्थलों तक पहुंची दरारें
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मोहल्ले के प्रमुख धार्मिक स्थल—राधाबल्लभ मंदिर और शांति नाथ मंदिर—सिनियर सैकेंडरी स्कूल की दिवार , स्टेट बैंक भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। इन मंदिरों की दीवारों में भी दरारें आ चुकी हैं, जिससे श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है।
इसके अलावा, स्टेट बैंक के आसपास स्थित कई मकानों में भी दरारें चौड़ी होती जा रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
प्रशासन की उदासीनता से नाराज लोग
मोहल्ले वासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार नगरपालिका प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ही आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
एक स्थानीय निवासी ने नाराजगी जताते हुए कहा, “हमने कई बार अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। अब जब मकान गिरने की नौबत आ गई है, तब भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।”
सड़क खुदवाकर पाइपलाइन सुधारने की मांग
स्थिति से परेशान होकर अब मोहल्ले वासियों ने खुद ही पहल करने का मन बना लिया है। लोगों ने मांग की है कि सड़क को खुदवाकर लिकेज पाइपलाइन को जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि मकानों की नींव में पानी जाना बंद हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो वे खुद सड़क खुदवाकर समस्या का समाधान करने के लिए मजबूर होंगे।
हर समय बना रहता है हादसे का डर
मोहल्ले में रहने वाले लोगों का कहना है कि अब वे हर समय डर के साए में जी रहे हैं। खासकर रात के समय मकानों में दरारों की आवाज सुनाई देने पर लोग दहशत में आ जाते हैं। कई परिवारों ने तो अपने बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना शुरू कर दिया है। मौहल्ले वासियों ने बताया की एक एक रुपए जमा करके तो ये मकान बनवाया। लेकिन मकानों की हालत दिन दिन दरारें आने से बिगड़ती जा रही है
वार्ड वासियों ने की जल्द समाधान की मांग
मोहल्ले वासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और जल्द से जल्द समाधान किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
वार्ड नंबर 13 का यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। जहां एक ओर लोग अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक जागता है और इस गंभीर समस्या का समाधान करता है।