कोलकाता। बंगाल के हुगली जिले में चौथी बार बेटी होने पर गला दबाकर नवजात की हत्या करने के मामले में अदालत ने माता-पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
जानकारी के अनुसार, हुगली के पांडुआ के मानुसमारी गांव निवासी पूर्णिमा टुडू और नारायण टुडू के घर 24 दिसंबर 2020 को चौथी बार बेटी का जन्म हुआ था।
चौथी बेटी होने पर नवजात की हत्या
आरोप है कि उसी दिन दोनों ने मिलकर नवजात बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी और घर के पास स्थित नाले में शव फेंक दिया। बाद में नाले से बच्ची का शव बरामद हुआ। पड़ोसी गणेश मुर्मू ने दंपती के खिलाफ हत्या की शिकायत दर्ज कराई थी।
मामले की जांच पांडुआ थाने के पुलिस अधिकारी बुद्धदेव सरकार ने की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद दंपती को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, शव बरामद होने के बाद भी दोनों ने बच्ची को अपनी संतान मानने से इनकार कर दिया था।
डीएनए जांच से साबित हुआ अपराध
बाद में अदालत के निर्देश पर कराई गई डीएनए जांच में दोनों का संबंध नवजात से साबित हो गया। हुगली के जिला मुख्य सरकारी अधिवक्ता शंकर गंगोपाध्याय ने बताया कि मामले में कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुबूत,गवाही और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने बुधवार को दोनों को दोषी करार दिया था।
गुरुवार को चुंचुड़ा की तृतीय दायरा अदालत के न्यायाधीश कौस्तभ मुखोपाध्याय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 302 के तहत दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।