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1 जून 2026
Epaper

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल, लॉयटरिंग म्यूनिशन और नेत्र के शानदार प्रदर्शन से विश्वभर में डिमांड बढ़ी, 38 हजार करोड़ का निर्यात बढ़ा

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल, लॉयटरिंग म्यूनिशन और नेत्र के शानदार प्रदर्शन से विश्वभर में डिमांड बढ़ी, 38 हजार करोड़ का निर्यात बढ़ा
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल, लॉयटरिंग म्यूनिशन और नेत्र के शानदार प्रदर्शन से विश्वभर में डिमांड बढ़ी, 38 हजार करोड़ का निर्यात बढ़ा

नई दिल्ली। भारतीय रक्षा उद्योग वैश्विक मंच पर एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल, लॉयटरिंग म्यूनिशन और 'नेत्र' जैसे स्वदेशी हथियारों के शानदार प्रदर्शन के बाद दुनिया भर में भारतीय 'वार' मशीनरी की मांग में भारी उछाल आया है।

रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62% अधिक है। भारत ने अब 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

ब्रह्मोस मिसाइल की दुनिया भर में बढ़ी मांग

भारत की सबसे घातक ब्रह्मोस मिसाइल के लिए फिलीपींस, वियतनाम और दो अन्य देशों के साथ करीब ₹12,500 करोड़ के सौदे हो चुके हैं। फिलीपींस के साथ करीब ₹3,200 करोड़ की डील पूरी हो चुकी है।

वियतनाम से ₹5,800 करोड़ की डील पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिसकी औपचारिक घोषणा जल्द होने वाली है। इंडोनेशिया में लगभग ₹3,600 करोड़ की डील अंतिम चरण में है, जबकि मलेशिया और थाईलैंड ने भी इसमें गहरी रुचि दिखाई है।

आकाश-1एस एयर डिफेंस सिस्टम

आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए आर्मेनिया के साथ ₹6,100 करोड़ का अनुबंध पहले ही हो चुका है और इसकी डिलीवरी वर्तमान में जारी है, जिसे हाल ही में आर्मेनिया की सालाना परेड में भी देखा गया था।

इसके अलावा, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों ने भी आकाश-1एस में रुचि दिखाई है, जबकि 'आकाश-एनजी' को लेकर नई बातचीत चल रही है।

पिनाका रॉकेट सिस्टम

दूसरी ओर, भारत की पिनाका बहु-नल रॉकेट प्रणाली की डिलीवरी आर्मेनिया को की जा चुकी है, जहां इसे 'शांत' नाम से सेना में शामिल किया गया है।

गाइडेड पिनाका की मारक क्षमता 75 किलोमीटर है और अब इसे खरीदने के लिए फ्रांस की संभावित रुचि की खबरें भी सामने आ रही हैं।

लॉयटरिंग म्यूनिशन और 'नेत्र' सिस्टम 

भारतीय लॉयटरिंग म्यूनिशन (नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर) की विदेशों में मांग तेजी से बढ़ी है। साइप्रस ने अपने 2026-31 के रक्षा रोडमैप में इसे खरीदने की इच्छा जताई है। इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों से भी लगातार पूछताछ आ रही है।

इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एचएएल (HAL) और अदानी डिफेंस जैसी कंपनियां अपना उत्पादन तेजी से बढ़ा रही हैं।

100 से अधिक देशों को निर्यात

भारत वर्तमान में दुनिया के 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिनमें अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया प्रमुख हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है, जहां बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए $2.8 अरब के भारतीय रक्षा उपकरण और कल्पुर्जे भेजे जाते हैं।

साल 2016-17 में भारत का रक्षा निर्यात मात्र ₹1,522 करोड़ था, जो एक दशक से भी कम समय में 25 गुना से अधिक बढ़ चुका है।