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23 अप्रैल 2026
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एंबुलेंस में गूंजी किलकारी, चलते वाहन में कराया सुरक्षित प्रसव

एंबुलेंस में गूंजी किलकारी, चलते वाहन में कराया सुरक्षित प्रसव
एंबुलेंस में गूंजी किलकारी, चलते वाहन में कराया सुरक्षित प्रसव

जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ, बिलोद गांव निवासी है प्रसूता
दैनिक सम्राट संवाददाता
जमवारामगढ़ (अंकिता शर्मा)।
जीवन और उम्मीद के बीच दौड़ती एक एंबुलेंस बुधवार को खुशियों की गवाह बन गई, जब अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसमें नवजीवन की किलकारी गूंज उठी। उप जिला अस्पताल जमवारामगढ़ से रेफर की गई प्रसूता ने रास्ते में ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। 108 एंबुलेंस के ईएमटी रमेश चंद कुम्हार ने बताया कि ग्राम बिलोद निवासी 27 वर्षीय भानु शर्मा, पत्नी मनोज कुमार शर्मा, को प्रसव पीड़ा बढऩे पर उप जिला अस्पताल से जयपुर के सांगानेरी गेट स्थित गणगौरी अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। 108 एंबुलेंस जयपुर-जमवारामगढ़ स्टेट हाइवे पर जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के पास पहुंची ही थी कि प्रसव पीड़ा अचानक तेज हो गई।ऐसे आपात हालात में एंबुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन रमेश चंद कुम्हार ने तत्परता और दक्षता का परिचय देते हुए चलती एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया। इस दौरान चालक सियाराम मीणा ने भी पूरी सतर्कता के साथ सहयोग किया। कुछ ही पलों में एंबुलेंस के भीतर नवजात बच्ची की किलकारी गूंज उठी।
बताया गया कि प्रसूता का यह दूसरा प्रसव था, जबकि पहला बच्चा ऑपरेशन से हुआ था, इसी कारण उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया था। बावजूद इसके, एंबुलेंस स्टाफ की सूझबूझ और प्रशिक्षण ने किसी बड़े जोखिम को टाल दिया।
प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षित रूप से गणगौरी अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया, जहां दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
यह घटना न केवल 108 एंबुलेंस सेवा की तत्परता और प्रशिक्षित स्टाफ की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही समय पर लिया गया निर्णय और सेवा भाव किसी भी आपात स्थिति को खुशियों में बदल सकता है। इसके साथ दूसरा पहलू यह भी है उप जिला स्तर का  अस्पताल होने व अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर व स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद प्रसूता को जयपुर रैफर करना पडा।  जो यह दर्शाता है कि उप जिला अस्पताल का स्टाफ रिस्क लेकर उपचार करने की बजाय रैफर में विश्वास करता है। जबकि अस्पताल में भी सामान्य प्रसव कराया जा सकता था। 

सीएचसी व दो पीएचसी से गुजरी प्रसूता
संस्थागत प्रसव को बढावा देने के लिए सरकार प्रसव कराने पर नगद सहायता प्रदान कर रही है। बिलोद से जमवारामगढ़ आते समय राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बासना व टोडामीना पड़ते है। बासना से आगे भानपुरकलां में राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय है। तीनों ही अस्पताल की हालत खराब है। जहां प्रसव नही के बराबर कराए जाते है।यदि इन अस्पतालों में इलाज होता तो प्रसूता को आसानी से जयपुर पंहुचाया जा सकता था।