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24 मई 2026
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हिण्डौन में सनसनीखेज मामला: एक ही गर्भवती महिला की रिपोर्ट में भारी अंतर, सरकारी लैब में प्लेटलेट्स मात्र 6 हजार, निजी लैब में 1.10 से 1.24 लाख

हिण्डौन में सनसनीखेज मामला: एक ही गर्भवती महिला की रिपोर्ट में भारी अंतर, सरकारी लैब में प्लेटलेट्स मात्र 6 हजार, निजी लैब में 1.10 से 1.24 लाख
हिण्डौन में सनसनीखेज मामला: एक ही गर्भवती महिला की रिपोर्ट में भारी अंतर, सरकारी लैब में प्लेटलेट्स मात्र 6 हजार, निजी लैब में 1.10 से 1.24 लाख

सरकारी रिपोर्ट पर उठे सवाल, जांच की विश्वसनीयता पर संदेह

एक्सपर्ट बोले - मशीन व पैथोलॉजिस्ट की गुणवत्ता तय करती है रिपोर्ट की सटीकता

हिण्डौन सिटी (ओमप्रकाश सुमन)। हिण्डौन में एक गर्भवती महिला की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला अस्पताल की लैब रिपोर्ट और निजी लैबोरेटरी की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स व हीमोग्लोबिन के स्तर में इतना बड़ा अंतर सामने आया है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार बालघाट इलाके के सिंघनिया गांव निवासी हेमा देवी को उल्टी-दस्त की शिकायत के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जँहा एक स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के सुझाव पर  सरकारी लैब पर हेमा की सीबीसी जांच कराई गई। जिसमें प्लेटलेट्स मात्र 6,000 और हीमोग्लोबिन 6.78 दर्ज किया गया। रिपोर्ट देखते ही डॉक्टरों ने गर्भवती महिला को तुरंत जयपुर के जनाना अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद रिपोर्ट से असंतुष्ट महिला के पति जितेंद्र ने सुरक्षा के मद्देनजर जिला अस्पताल के बाहर स्थित दो अलग-अलग निजी लैबों से जांच कराई। दोनों निजी लैब रिपोर्टों में चौंकाने वाले परिणाम आए। पहली निजी लैब की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 1,24,000 व हीमोग्लोबिन 9.07 तथा दूसरी निजी लैब की रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 1,10,000 और हीमोग्लोबिन 11.00 दर्ज किया गया था।
एक ही दिन में एक ही मरीज की तीन अलग-अलग रिपोर्टों में इतना बड़ा अंतर देखकर मरीज के परिजनों में आक्रोश व्याप्त हो गया। उन्होंने इस मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मंत्री को शिकायत भेजी है।
किस पर करें विश्वास, कौन सी रिपोर्ट सही: एक ही मरीज की अलग-अलग रिपोर्ट आने के बाद रोगी और उनके परिजन असमंजस की स्थिति में है। आखिर सही रिपोर्ट कौन-सी है और इलाज किस आधार पर लिया जाए। 
एक्सपर्ट व्यू...
हिण्डौन जिला अस्पताल के पूर्व प्रमुख चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा डॉ. नमोनारायण मीणा के अनुसार, जांच रिपोर्ट में अंतर कई कारणों से हो सकता है। इनमें मशीन की गुणवत्ता, कैलिब्रेशन, रिएजेंट्स की ताजगी और पैथोलॉजिस्ट का अनुभव सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। सरकारी लैबों में अक्सर पुरानी मशीनें और संसाधनों की कमी के कारण त्रुटि की संभावना अधिक रहती है। यह घटना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को उजागर करती है। लोगों में सरकारी लैब रिपोर्टों के प्रति भरोसा कम होता जा रहा है।
उठ रहे प्रमुख सवाल
ठ्ठ    क्या जिला अस्पताल की लैब में मशीन ठीक से काम नहीं कर रही थी?
ठ्ठ    क्या सैंपल हैंडलिंग में कोई गड़बड़ी हुई?
ठ्ठ    गर्भवती महिला का सही इलाज अब किस रिपोर्ट के आधार पर किया जाए?
इनका कहना है...
जिला अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर पुष्पेंद्र गुप्ता ने बताया कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया लेकिन चिकित्सक को ही जांच रिपोर्ट देखने के बाद सरकारी लैब की दूसरी मशीन पर जांच करवा लेनी चाहिए थी, जिससे डाउट क्लियर हो सके। मरीजों की बेवजह परेशानी को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकों को ऐसी चीजों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मैं इस मामले को पर्सनल देखूंगा।