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5 अप्रैल 2026
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पश्चिमी विक्षोभ- कल हुई ओलावृष्टि से फसलें हुई बर्बाद, खड़ी फसलों ने ओलों की चादर ही ओढ़ ली

पश्चिमी विक्षोभ- कल हुई ओलावृष्टि से फसलें हुई बर्बाद, खड़ी फसलों ने ओलों की चादर ही ओढ़ ली
पश्चिमी विक्षोभ- कल हुई ओलावृष्टि से फसलें हुई बर्बाद, खड़ी फसलों ने ओलों की चादर ही ओढ़ ली

जयपुर।  पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजस्थान में शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। तेज आंधी, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और आम लोगों को परेशान कर दिया। वहीं उत्तरी राजस्थान में इस सबसे ज्यादा असर देखने को मिला।

सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में तेज बादल गरजने के साथ 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बारिश हुई। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई।

श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज

जयपुर के मौसम विज्ञान (IMD) केंद्र के अनुसार, श्रीगंगानगर के पदमपुर में सबसे ज्यादा 11.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जबकि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि ने खेतों को सफेद चादर ओढ़ा दी।

 

 

चूरू के सरदारशहर में धूल भरी आंधी ने पूरे आसमान को अपनी चपेट में ले लिया। वहीं जयपुर में पूरे दिन बादल छाए रहे और अजमेर, सीकर, नागौर समेत कई जिलों में बौछारें पड़ीं।

तेज आंधी-बारिश की चेतावनी जारी

मौसम विभाग ने 4 अप्रैल (शनिवार) को उदयपुर, अजमेर, कोटा, जयपुर, भरतपुर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ जिलों में तेज आंधी-बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। रविवार (5 अप्रैल) और सोमवार (6 अप्रैल) को मौसम गतिविधियों में कुछ कमी आने की संभावना है। वहीं 7 अप्रैल को एक और नया मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में फिर से तेज आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

तैयार फसलों को सुरक्षित करने के निर्देश

श्रीगंगानगर के अर्जुनसर और राजियासर क्षेत्र में दोपहर करीब 3:15 बजे हुई ओलावृष्टि ने खेतों को पूरी तरह सफेद कर दिया। स्थानीय किसानों का कहना है कि इतने बड़े ओले कई सालों बाद बरसे हैं। गेहूं और अन्य फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग की सलाह है कि पककर तैयार फसलों, कृषि मंडियों और धान मंडियों में खुले में रखे अनाज और जिंसों को ढककर रखें या फिर सुरक्षित स्थान पर भंडारण करें। ताकि बारिश और ओलावृष्टि से उन्हें नुकसान न पहुंचे।