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5 अप्रैल 2026
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आदर्श घोटाले के पीडि़तों के साथ डबल गेम खेल रही भाजपा सरकार: टीकाराम जूली

आदर्श घोटाले के पीडि़तों के साथ डबल गेम खेल रही भाजपा सरकार: टीकाराम जूली
आदर्श घोटाले के पीडि़तों के साथ डबल गेम खेल रही भाजपा सरकार: टीकाराम जूली

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार और उसकी न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए
जयपुर
। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शुक्रवार  को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार और उसकी न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। जूली ने राजस्थान की लाखों गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों का पैसा हड़पने वाले बहुचर्चित आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राजस्थान की भाजपा सरकार, डबल इंजन सरकार  एक वकील को डबल रोल में रखकर लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ अन्याय कर रही है।राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में भी जूली ने आदर्श घोटाले के पीडि़तों के पक्ष में यह आवाज उठाई थी लेकिन सरकार पीडि़तों के प्रति असंवेदनशील बनी हुई हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्ष 1999 में मुकेश मोदी और उनके परिवार द्वारा शुरू की गई इस सोसाइटी ने 2010 से 2014 के बीच करीब 22 लाख मासूम लोगों से 15,000 करोड़ रुपये की ठगी की। जांच में सामने आया कि लगभग 125 फर्जी (शैल) कंपनियों के माध्यम से जनता का पैसा मोदी परिवार के सदस्यों और उनके करीबियों तक पहुंचाया गया। 2018 में एसओजी की एफआईआर के बाद गिरफ्तारियां तो हुईं, लेकिन आज न्याय की उम्मीद पर सरकार के वकील ही पानी फेर रहे हैं। जूली ने बताया कि अन्य आरोपियों के अतिरिक्त इसमें एक आरोपी सिद्धार्थ चौहान भी शामिल है।  सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस केस की पैरवी कर रहे ्र्रत्र शिवमंगल शर्मा और उनकी लॉ फर्म ऑरा एंड कंपनी का इस घोटाले के आरोपियों के साथ गहरा संबंध है। उन्होंने बताया कि इसी घोटाले में दो और मुकदमे गुडग़ांव एवं दिल्ली में चल रहे है।  इन मुकदमों में सिद्धार्थ चौहान सह आरोपी है एवं अभी तक फरार होने के कारण भगौड़ा घोषित किया जा चुका है। 
इस आरोपी सिद्धार्थ चौहान के दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे में आरोपी की ओर से लॉ फर्म लिए ऑरा एंड कंपनी नियुक्त है जो वकील शिवमंगल शर्मा, सौरभ राजपाल, निधि जायसवाल तथा इनके साथियों की फर्म है।  
उन्होंने सवाल उठाया, यह कैसे संभव है कि एक तरफ वही वकील दिल्ली में घोटाले के आरोपी को बचाने की पैरवी कर रहे हैं और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की ओर से पीडि़तों का पक्ष रखने का ढोंग कर रहे हैं? यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है और पैसा गँवा चुके  निवेशकों की आंखों में धूल झोंकना है।