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21 मई 2026
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ईरान को लेकर अमेरिका-इजराइल में मतभेद सामने आए,अमेरिका सीजफायर तो इजराइल जंग चाहता है, ट्रंप से नाराज हुए नेतन्याहू

ईरान को लेकर अमेरिका-इजराइल में मतभेद सामने आए,अमेरिका सीजफायर तो इजराइल जंग चाहता है, ट्रंप से नाराज हुए नेतन्याहू
ईरान को लेकर अमेरिका-इजराइल में मतभेद सामने आए,अमेरिका सीजफायर तो इजराइल जंग चाहता है, ट्रंप से नाराज हुए नेतन्याहू

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान पर हमले जारी रहें, जबकि ट्रम्प फिलहाल बातचीत और डील को मौका देना चाहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा कि ईरान पर प्रस्तावित हमले रोकना गलती है और सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

CNN के मुताबिक, ट्रम्प ने रविवार को नेतन्याहू को बताया था कि अमेरिका ईरान पर नए टारगेटेड हमले की तैयारी कर रहा है।

इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ नाम दिया जाना था। लेकिन करीब 24 घंटे बाद ट्रम्प ने घोषणा कर दी कि मंगलवार के लिए तय हमलों को फिलहाल रोक दिया गया है। ट्रम्प ने कहा कि कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देशों की अपील पर यह फैसला लिया गया।

1. अमेरिकी संसद में ईरान जंग रोकने वाला प्रस्ताव पास: अमेरिकी सीनेट में ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 से पास हुआ। 4 रिपब्लिकन सांसदों ने भी ट्रम्प के खिलाफ वोट दिया। अगर कानून बना तो ईरान के खिलाफ जंग जारी रखने के लिए ट्रम्प को कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी।

2. ट्रम्प बोले- ईरान की नेवी और एयरफोर्स खत्म: US कोस्टगार्ड एकेडमी में ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अब सवाल सिर्फ यह है कि अमेरिका आगे पूरी कार्रवाई करेगा या ईरान समझौता करेगा।

3. ईरान की मंजूरी से 26 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे: IRGC ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में 26 जहाज ईरानी मंजूरी के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल टैंकर और कॉमर्शियल जहाज शामिल थे।

4. UAE होर्मुज बायपास करने के लिए नई पाइपलाइन बना रहा: ADNOC ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाली नई तेल पाइपलाइन का 50% काम पूरा हो चुका है। युद्ध के बाद फुजैराह तेल हब पर ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं।

5. UN ने चेतावनी दी- होर्मुज संकट से फूड क्राइसिस का खतरा: UN की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने कहा कि होर्मुज में रुकावट बढ़ी तो दुनिया में खाद्य संकट और महंगाई बढ़ सकती है। एजेंसी ने देशों से वैकल्पिक सप्लाई रूट तैयार करने की अपील की।

इटली ने EU से इजराइल के मंत्री पर बैन लगाने की मांग की

इटली ने इजराइल के दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन-ग्विर पर यूरोपीय संघ से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यह मांग उस वीडियो के बाद उठी जिसमें गाजा जा रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को घुटनों के बल बैठे और हाथ बंधे हुए दिखाया गया।

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने बेन-ग्विर के खिलाफ सैंक्शन लगाने की मांग की है।

तजानी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फ्लोटिला कार्यकर्ताओं को रोकना, उन्हें हिरासत में लेना और कथित तौर पर अपमानित करना बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

ईरान में 83 दिन से इंटरनेट बंद

ईरान में इंटरनेट शटडाउन को आज 83 दिन हो गए हैं। इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक देश में अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क करीब 1968 घंटे से ज्यादा समय से बड़े पैमाने पर बंद हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ईरान सरकार ने 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के कुछ घंटों के भीतर ही देशभर में इंटरनेट पाबंदियां लगा दी थीं।

इससे पहले जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी करीब 20 दिनों तक इंटरनेट सेवाएं बाधित रही थीं।

रूस बोला- ईरान के हितों को नजरअंदाज करने से विवाद नहीं सुलझेगा

रूस ने कहा है कि ईरान संकट का हल सिर्फ डिप्लोमेसी और बातचीत के जरिए ही संभव है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि ईरान के हितों का सम्मान किया जाना जरूरी है।

जखारोवा ने कहा कि रूस, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के जरिए जो भी समझौता होगा, उसे लागू कराने में मदद देने के लिए तैयार है।

उन्होंने यह भी साफ कहा कि ईरान के यूरेनियम भंडार का भविष्य तय करने का अधिकार सिर्फ ईरान के पास है। इस मुद्दे पर कोई बाहरी देश फैसला नहीं कर सकता।

एक्सपर्ट बोले- असीम मुनीर का ईरान दौरा युद्ध रोकने की आखिरी कोशिश

पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर की तेहरान यात्रा को ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को रोकने की आखिरी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य-पूर्व में फिर से युद्ध शुरू होने का खतरा बना हुआ है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस स्तर की बातचीत हो रही है, तो जरूर कोई अहम संदेश एक-दूसरे तक पहुंचाए जा रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अब भी कई बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।

ईरान चाहता है कि उसे इस बात की गारंटी मिले कि उसके खिलाफ दोबारा युद्ध नहीं होगा। लेकिन अमेरिका यह भरोसा देने की स्थिति में नहीं है कि इजराइल भविष्य में ईरान के भीतर बड़े हमले या हाई-प्रोफाइल हत्याएं नहीं करेगा।

ईरान की मांग है कि उसे होर्मुज पर कंट्रोल बनाए रखने दिया जाए, उसकी फ्रीज की गई विदेशी प्रॉपर्टी वापस की जाए और कुछ मात्रा में एनरिच्ज यूरेनियम देश के भीतर रखने की इजाजत हो।

वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने ज्यादातर परमाणु ठिकानों को बंद करे। अमेरिका का कहना है कि केवल तेहरान का एक परमाणु केंद्र चालू रह सकता है, लेकिन वहां यूरेनियम संवर्धन नहीं होना चाहिए।

समझौते को लागू करने के तरीके को लेकर भी दोनों देशों में मतभेद हैं। अमेरिका चाहता है कि सभी शर्तें एक साथ लागू हों, जबकि ईरान चरणबद्ध तरीके से समझौता लागू करने की बात कर रहा है।

रिपोर्ट- अमेरिका सीजफायर तो इजराइल जंग चाहता है

अमेरिका जहां ईरान के साथ तनाव कम करने और सीजफायर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं इजराइल में फिर से युद्ध की बातें तेज हो गई हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ईरान पर सख्त रुख बनाए रखना चाहती है।

इजराइल के एक टीवी एंकर शिमोन रिक्लिन ने लाइव शो में दावा किया कि तेहरान पर दोबारा हमला हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के एक कथित यूरेनियम स्टोरेज ठिकाने को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक काल्पनिक चर्चा थी।

इस बयान के बाद इजराइल में विवाद शुरू हो गया। कई नेताओं ने कहा कि इस तरह की बातें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती हैं और सार्वजनिक तौर पर नहीं कही जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है, लेकिन अमेरिका की मंजूरी के बिना बड़ा हमला करना उसके लिए आसान नहीं होगा।