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19 अप्रैल 2026
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दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चार चीते बेंगलुरु पहुंचे, सरकार चीतों को फिर से बसाने के लिए प्रयास कर रही

दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चार चीते  बेंगलुरु पहुंचे,  सरकार चीतों को फिर से बसाने के लिए प्रयास कर रही
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चार चीते बेंगलुरु पहुंचे, सरकार चीतों को फिर से बसाने के लिए प्रयास कर रही

नई दिल्ली। चार चीते दो नर और दो मादा शनिवार को बेंगलुरु पहुंचे हैं। ये चीते दक्षिण अफ्रीका से लाए गए हैं। सरकार भारत में चीतों को फिर से बसाने के लिए यह प्रयास कर रही है।

ये चीते दक्षिण अफ्रीका से विशेष विमान से लाए गए। पूरे समय पशु चिकित्सक और वन विभाग के कर्मचारी इनकी निगरानी करते रहे। अब इन्हें बेंगलुरु के पास स्थित बनरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान में ले जाया जाएगा।

नए माहौल और मौसम बनेगी परेशानी

कर्नाटक के वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री ईश्वर बी. खांड्रे ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन चीतों को नए माहौल और मौसम के कारण कोई परेशानी या बीमारी न हो।

उन्होंने कहा, “चीतों को पहले 30 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा। उन्हें सही आहार दिया जाएगा और किसी भी संक्रमण की जांच की जाएगी। उसके बाद ही उन्हें बनरघट्टा में सुरक्षित तरीके से ले जाया जाएगा।”
चीतों का पुराना घर कर्नाटक

मंत्री ने बताया कि पहले कर्नाटक के जंगलों में भी चीते घूमते थे, लेकिन अब वे यहां से गायब हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “लोगों को कम से कम चिड़ियाघर या उद्यान में चीतों को देखने का मौका तो मिलना चाहिए। इनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।”

क्या है प्रोजेक्ट चीता?

ये चार चीते प्रोजेक्ट चीता के तहत लाए गए हैं। यह भारत सरकार की एक बड़ी वन्यजीव परियोजना है, जिसे साल 2022 में शुरू किया गया था। परियोजना की शुरुआत सितंबर 2022 में हुई थी, जब नामीबिया से 8 अफ्रीकी चीते भारत लाए गए थे। उन्हें मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था।

हाल ही में कुनो नेशनल पार्क में एक 25 महीने की भारतीय जन्मी मादा चीता (KGP-2) ने चार शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही भारत में कुल चीतों की संख्या अब 57 हो गई है। भारत में एशियाई चीता साल 1952 में आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। आखिरी चीते कुछ साल पहले तक देखे गए थे।