पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं से TMC के संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हम पार्टी दफ्तरों को दोबारा खोलेंगे, उन्हें रंगेंगे और मजबूती से काम पर लौटेंगे। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी दफ्तरों को पेंट करने के लिए तैयार हूं।
इसके बाद उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, वे पूरी तरह आजाद हैं और वे किसी को भी जबरदस्ती रोक कर रखने में यकीन नहीं रखतीं। बैठक के दौरान ममता के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे।

कोलकाता में हुई बैठक में अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे।
ममता ने कहा- जनादेश लूटा गया
बैठक में ममता ने कहा कि चुनाव के नतीजों में भले ही TMC को 80 सीटें मिली हों, लेकिन यह जनादेश की लूट है। इससे उनका हौसला नहीं टूटेगा। 21 मई को फालता सीट पर होने वाले उपचुनाव के उम्मीदवार भी मौजूद थे।
दरअसल, फालता में 29 अप्रैल को वोटिंग हुई थी, लेकिन EVM छेड़खानी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने वहां दोबारा वोटिंग कराने का फैसला किया। 4 मई को आए 293 सीटों के नतीजों में BJP को 207 सीटें मिली थीं।
ममता ने इस्तीफा नहीं दिया, चुनावी हिंसा पर कोट पहुंची
- 5 मई: ममता ने 4 मई को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, 'मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी। चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी।'
- 14 मई: ममता को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के सामने पेश हुईं। मामला हाल के राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा से जुड़ी जनहित याचिका का था। सुनवाई के दौरान ममता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इसमें बुलडोजर एक्शन भी शामिल है। पुलिस FIR दर्ज करने की परमिशन नहीं दे रही है।