बार एसोसिएशन ने विधायक को सौंपा ज्ञापन, आदेश वापस लेने की उठाई मांग
दैनिक सम्राट संवाददाता
जमवारामगढ़ (अंकिता शर्मा)। रायसर थाना क्षेत्र के 35 गांवों का न्यायिक क्षेत्राधिकार परिवर्तन को लेकर स्थानीय अधिवक्ताओं में गहरा रोष देखने को मिल रहा है। पुलिस थाना रायसर के 35 गांवों के आपराधिक प्रकरणों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार अब जमवारामगढ़ से शाहपुरा स्थानांतरित किए जाने के विरोध में दी बार एसोसिएशन जमवारामगढ़ ने विधायक महेन्द्र पाल मीणा को ज्ञापन सौंपकर आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करवाने की मांग की है।
ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने बताया 15 अप्रैल 2026 को रायसर थाना क्षेत्र के 35 गांवों के आपराधिक मामलों की सुनवाई अब सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट शाहपुरा को सौंप दी गई है। इस निर्णय से स्थानीय पक्षकारों और अधिवक्ताओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। दूरी और संसाधनों की कमी बनी बड़ी समस्या अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि रायसर थाना एवं संबंधित गांवों से शाहपुरा की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है, जबकि जमवारामगढ़ की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है। इसके अलावा इन गांवों से शाहपुरा के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। अधिकतर पक्षकार किसान वर्ग से जुड़े होने के कारण उनके लिए बार-बार लंबी दूरी तय करना आर्थिक और समय की दृष्टि से कठिन साबित होगा। ज्ञापन देने के बाद विधायक महेंद्रपाल मीना ने विधि जोगाराम से दूरभाष पर वार्ता करके सिविल कोर्ट शाहपुरा में शामिल किए गए रायसर थाना क्षेत्र के गांवो को पुन: सिविल कोर्ट शाहपुरा में शामिल करवाने का अनुरोध किया। ज्ञापन देने के दौरान बार एसोसिएशन के एडवोकेट हिम्मत सिंह राघव, मुकेश शर्मा डांगरवाडा,राकेश शर्मा, दीपचंद महावर,प्रशासक धौला प्रकाश गुर्जर, प्रशासक गठवाडी बाबूलाल मीना,श्याम कुमावत आदि मौजूद थे।
सभी प्रमुख सरकारी कार्यालय जमवारामगढ़ में स्थित: ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित 35 गांवों के राजस्व न्यायालय, उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर (फास्ट ट्रैक), तहसील न्यायालय, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय एवं विद्युत विभाग का मुख्यालय जमवारामगढ़ में ही स्थित है। ऐसे में सभी प्रकार की कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाहियों के लिए जमवारामगढ़ अधिक सुविधाजनक है।
न्याय सुलभता के सिद्धांत के विपरीत: निर्णय अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय का मूल सिद्धांत है कि आमजन को न्याय सुलभ और सहज रूप से प्राप्त हो। शाहपुरा स्थानांतरण का यह निर्णय इस सिद्धांत के विपरीत है और इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ेगी।
आदेश निरस्त कर पुन: जमवारामगढ़ में बहाल करने की मांग: अंत में बार एसोसिएशन जमवारामगढ़ एवं अधिवक्ताओं ने विधायक से अनुरोध किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए उक्त आदेश को रिकॉल कर संबंधित क्षेत्राधिकार को पुन: सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट जमवारामगढ़ को ही सौंपा जाए।
सिविल कोर्ट की जमीन आवंटन की मांग भी उठाई: अधिवक्ताओं ने सिविल कोर्ट जमवारामगढ़ के भवन निर्माण के लिए जमीन आवंटन की भी विधायक से मांग की। इस पर विधायक ने जेडीए जोन दस उपायुक्त राधिका देवी से वार्ता करके जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढाने पर जोर दिया।
इनका कहना है
विधानसभा के रायसर थाना क्षेत्र के गांवो को शाहपुरा सिविल कोर्ट में शामिल करना गलत है। प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था एक ही उपखंड में होनी चाहिए।
-महेंद्र पाल मीना, विधायक, जमवारामगढ़
रायसर थाना के पैंतीस गांवों का क्षेत्राधिकार शाहपुरा सिविल कोर्ट को सौंपा, क्षेत्राधिकार बदलने पर अधिवक्ताओं में आक्रोश
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