सपनों को नई उड़ान देने वाला स्टेडियम प्रशासन की लापरवाही के चलते बदहाली, सुविधाओं के अभाव और असामाजिक तत्वों (नशेडिय़ों) के अड्डे में हो रहा तब्दील
दैनिक सम्राट संवाददाता
बस्सी (डी.सी.बेनिवाल)। महात्मां गांधी खेल स्टेडियम, बिराजपुरा बस्सी सुविधाओं एंव एम्प्लॉई के अभाव में क्षतिग्रस्त होकर नशेडिय़ों का अड्डा बना हुआ है। खेल मैदान में बना एक छोटा सा भवन भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर गिरने की कगार पर है। यहां उगी कंटीली झाडिय़ों, पव्वे, बोतलें, कचरे को देखकर ऐसा लगता है। कि इस स्टेडियम की सार-संभाल, देखरेख की जिम्मेदारी कोई उठाता ही नहीं है। दर्शकों के लिए बनाये गये दोनों प्लेटफार्म भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। सिंगल फेज ट्यूबवेल पर टंकी और कनेक्शन दोनों ही गायब है। खिड़कियां टूटी हुई है। भवन में लोहे के सरिये निकले हुए हैं, जीना अथवा सिढिय़ो का हिस्सा कभी भी गिर सकता है। स्टेडियम के चारो ओर स्ट्रीट लाइटें नहीं होने से अंधेरा छाया रहता है। ऐसा लगता है कई वर्षों से इसकी रिपेयरिंग और रंगाई-पुताई नहीं हुई हो।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, क्षेत्रीय विधायक, उपखण्ड अधिकारी, अधिशाषी अधिकारी, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कल्याणगंज बस्सी प्रधानाचार्या पर भी सवाल उठ रहे।
हालांकि इस स्टेडियम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, क्षेत्रीय विधायक, उपखण्ड अधिकारी, अधिशाषी अधिकारी, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कल्याणगंज बस्सी प्रधानाचार्या की उपस्थिति एंव उनके मुख्य आतिथ्य में यहां सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कार्यक्रम, स्कूली प्रतियोगिता, जिला स्तरीय टूर्नामेंट, तहसील स्तरीय समारोह, खेलकूद प्रतियोगिताएं, गणतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिवस, समेत अन्य बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इसके बावजूद खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रशासन ने इस स्टेडियम का कायाकल्प नहीं कराया है। राज्य सरकार विकास के अन्य कार्यों पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करती है, लेकिन यहां सुविधाओं से लेस स्टेडियम निर्माण पर किसी भी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी ने सरकार के पास बात नहीं पहुंचाई है। करोड़ो की जमीन पर बना यह खेल स्टेडियम युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के लिए है, लेकिन जिम्मेदारो की लापरवाही से बदहाली, सुविधाओं के अभाव और असामाजिक तत्वों (नशेडिय़ों) के अड्डे में तब्दील होता जा रहा हैं। यह स्थिति देश की खेल प्रतिभाओं के लिए एक बड़ा खतरा है। सुविधाओं के अभाव के चलते स्टेडियम में शौचालय, बिजली, पीने का पानी, छाया, बारिश से बचने के लिए जगह और बाउंड्री वॉल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जिससे खिलाड़ी, विशेषकर महिला खिलाड़ी, यहां जाने से डरते हैं। प्रशासन की अनदेखी के कारण मैदान ऊबड़-खाबड़ हो गया हैं, घास उगी हुई है और खेल का सामान तो यहां मौजूद ही नहीं है।
प्रशिक्षण में बाधा- कैसे निखरेगी प्रतिभाएं
यहां सुविधाओं की कमी के कारण स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका नहीं मिल रहा है, जिससे वे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। सुरक्षित वातावरण न होने के कारण माता-पिता अपने बच्चों को स्टेडियम भेजने से कतराते हैं। जहां खेलने की जगह होनी चाहिए, वहां नशा होने से युवा गलत दिशा में जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश की भावी पीढ़ी को खोखला कर रहा है।
समाधान की राह
महात्मा गांधी खेल स्टेडियम बिराजपुरा बस्सी में सुरक्षा गार्ड तैनात होना जरूरी है और बाउंड्री वॉल को दुरुस्त किया जाए। खेल परिसर के रखरखाव के लिए स्थानीय कमेटियां बनें और सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार रखरखाव को प्राथमिकता दी जाए।
खेल सुविधाओं के संचालन और रखरखाव के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप को बढ़ावा दिया जाए।
योग्य कोच की नियुक्ति और खेल के उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
स्थानीय निवासियों को स्टेडियम के रखरखाव में शामिल किया जाए।
स्टेडियम खेल का मंदिर बने रहने चाहिए, न कि नशेडियों का अड्डा। अगर प्रतिभाओं को निखारना है, तो बुनियादी ढांचा सुरक्षित और सुसज्जित करना अनिवार्य है।


